मुझे कुछ ज़रूरी सरकारी काम है और सभी जानते हैं कि हमे देश में सरकारी काम कराना काफी मुश्किल है। चूंकि मैं एक प्राइवेट कंपनी में एक कार्यरत हूं, तो हमें काम भी करना होता है, इसीलिए मैं कभी भी उनके कहे मुताबिक उनके office में available नहीं हो सकता क्यूंकि हमें पहले से plan करना होता है। इसलिए मुझे सरकारी अधिकारियों से deal करने के लिए किसी तीसरे बन्दे की जरूरत थी जो मैंने arrange कर लिया। लेकिन, मैंने सोचा की मेरी absense की वजह से अगर उन्हों ने (सरकारी अधिकारी) मेरा Application Reject कर दिया तो गड़बड़ हो जाएगी, इसलिए मैंने उन्हें रिश्वत देने का विचार किया। मैंने शशी से कहा कि Mediator को बोल दो कि अगर सरकारी अधिकारी पैसों की Demand करे तो दे देना, लेकिन उसने मेरे फैसले का विरोध किया और कहा कि मैं हमेशा रिश्वत से दूर रहने की बात करता हूं लेकिन जब यह मेरे खुद के काम की बात आयी, तो मैं खुद भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित कर रहा हूँ। मुझे उसकी बात पसंद नहीं आयी और हमने काफी देर तक इस बारे में argument किया जहां मैं ये साबित करने की कोशिश कर रहा था कि मैं सही था और वह मुझे यह महसूस कराने की कोशिश कर रही थी कि रिश्वत देने का मेरा निर्णय गलत था। अंत में, मैं argument जीत गया या शायद उसने मुझे जीतने दिया था। हालांकि, तब तक, मुझे एहसास हो चूका था कि रिश्वत देने का मेरा निर्णय गलत था और मैंने यह विचार छोड़ दिया।
इस तरह उसने मुझे भ्रष्टाचार करने से रोक दिया क्योंकि हम (मैं और शशी) हमेशा बात करते हैं कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए कोई व्यक्ति अपना योगदान कैसे दे सकता है। तो अगर आप अपने आस-पास के लोगों के साथ अच्छी चीजों पर चर्चा करते हैं, तो आप अपने आस-पास एक अच्छा वातावरण बनाएंगे और इससे आपको बुरी गतिविधियों से दूर रहने में मदद मिलेगी जो की मेरे साथ हुआ।
पिछले हफ्ते जब मैं लखनऊ छुट्टी पर गया था, मैंने उन लोगों से मिला जिनके पास नौकरी थी लेकिन वे काम करने के इच्छुक नहीं थे। इस प्रकार के लोग न केवल सरकारी क्षेत्र में हैं बल्कि वे Private Sector में भी हैं। मैं पहले Private Sector के कर्मचारी के बारे में बात करूंगा।
लखनऊ के कुछ ऐतिहासिक स्थानों को देखने के बाद हम थक गए थे, इसलिए हमने फिल्म देखने का फैसला किया ताकि हम वहां बैठकर आराम कर सकें। हम सहारागंज लखनऊ में PVR सिनेमा गए और फिल्म “जुरासिक वर्ल्ड” के लिए दो टिकट पीवीआर की Ticketing Executing से मांगा। लेकिन उसका बात करने का तरीका ऐसा था जैसे मैंने उसे ऐसा कुछ करने के लिए कह रहा था जो उसका काम नहीं था। इसके अलावा जब मैंने उससे कहा कि हमें Meal Combo नहीं चाहिए, सिर्फ Movie Ticket चाहिए, तब उसने बहुत ही बदतमीज़ी से जवाब दिया। उसने कहा, “150 रूपए में Combo कहां मिलता है।” और फिर शशी को उसे सिखाना पड़ा कि उसे ग्राहक से कैसे बात करनी चाहिए। उसने उससे (पीवीआर कर्मचारी) कहा कि अगर वह काम करने में interested नहीं है तो उसे ग्राहक के साथ बदतमीज़ी करने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही उसने Public Dealing में आने से पहले कुछ शिष्टाचार सीखने के लिए उससे (पीवीआर कर्मचारी से) कहा। इतनी डांट खाने के बाद, उसने माफ़ी मंगीऔर वह भी बदतमीज़ी से। अगला ग्राहक काउंटर पर आया और हम Side हो गए लेकिन उस ग्राहक से Deal करते हुए भी हमने उसके (पीवीआर कर्मचारी) व्यवहार में कोई बदलाव नहीं देखा। वह अभी भी ऐसे behave कर रही थी जैसे वह कहना चाहती है, “बस अपना टिकट लो और भांड में जाओ”। हम वहां से चले गए क्योंकि हम समझ गए कि महिला यह समझने की कोशिश नहीं कर रही थी कि हम क्या कह रहे थे। और उसके लिए नौकरी बिना कुछ काम किये पैसा पाने का एक जरिया मात्र था।
अगले दिन हम लखनऊ में चारबाग बस स्टेशन गए क्योंकि हमें प्रतापगढ़ जाना था। हम सिर्फ ये पूछने के लिए पूछताछ काउंटर गए कि A.C. Bus किस प्लेटफार्म पर आती है। लेकिन वहां भी, कर्मचारी आपस में गप्पे मार रही थी और हमें ऐसे अनदेखा कर रही थी जैसे हमने उससे उसकी किडनी मांग ली हो। हमने बस के बारे में 3-4 बार पूछा लेकिन उसे उससे कोई जवाब नहीं मिला। जब भी हम उससे बस के बारे में पूछते थे, वह वापस अपने Colleagues से फालतू के गप्पे मारने लग जाती पर उसने हमें Information नहीं दी। अंत में, मुझे उससे कहना पड़ा, “फ्री की रोटी ही तोड़नी है क्या, कुछ काम भी कर लिया कर।” फिर भी, उसने मुझे जानकारी नहीं दी और हमें चाय वाले से जानकारी प्राप्त करनी पड़ी।
इन दो घटनाओं के अलावा, मैंने इस तरह के बहुत से लोगों को, काम पर और अन्य स्थानों पर देखा है, जिनके पास नौकरी है लेकिन वे बिल्कुल भी काम करना नहीं चाहते हैं। मैं सिर्फ उनसे पूछना चाहता हूं कि जब उन्हें काम करना ही नहीं है तो Governments से Job Creation की बात क्यों करते हैं। इन लोगों को यह जान लेना चाहिए कि वे फालतू के, निकम्मे, बेकार और घटिया लोग हैं जो किसी भी समाज में सम्मानजनक स्थान पाने के योग्य नहीं हैं।
मुझेसमझमेंनहींआताकिलोगविरोधकरनेकेलिएइनअमानवीयतरीकोंकाउपयोगक्योंकरतेहैं।कभीवेआमजनताऔरसार्वजनिकसंपत्तिकोनुकसानपहुंचातेहैंतोकभीवेऐसेकामकरनाशुरूकरतेहैंजैसेवेअबकररहेहैं। येलोगकेवलराजनीतिकदलोंकोसुनकरउनकीमनकाकामकरतेहैंलेकिनवेअपनेदिमागकाउपयोगनहींकरतेऔरयही कारण है जिसकी वजह से हमारादेशपिछड़ेपनसेपीछानहींछुड़ापारहाहै।
पिछलेSatarday, जबमैंकुछ
Shares के Charts checkकररहाथा, मैंनेकच्चेतेलकाchartभीदेखा।मैंनेदेखा,किपिछले 08-09 महीनोंमेंयहलगभग 50% बढ़गयाहै।इत्तेफ़ाक़से, उसीसमय, एक news channelपेबढ़तेPetrol
PriceपरNewsचलरहीथी,
तोमैंनेएकपोस्टशेयरकरदी. मैंनेलिखा,
“Petrol price is up because crude oil is up. लोगकहेंगे,किमोदीने
rates बढ़ादिएपरआपकोअपनादिमागभीलगानाहै।”
मैंनेयेपोस्टडालीक्योंकिमैंप्रधानमंत्रीश्रीनरेंद्रमोदीकोसपोर्टकरताहूंऔरमैंनहींचाहताकिउनके Sopporters कच्चेतेलकीकीमतमेंबढ़ोतरीकेचलते, बढ़तेहुए Petrol Price केकारणआनेवालेचुनावोंमेंउन्हेंसत्तासेबाहरकरदें।उसपोस्टकेबादमुझेकुछ Abusive comments मिलेऔरउनtrollersनेकहाकिभक्त short
term memory lossहोतेहैंऔरमुझेवर्तमानमेंकच्चेतेलकीकीमतोंकीतुलनावर्ष 2014 सेपहलेकच्चेतेलकीकीमतोंकेसाथकरनीचाहिए।इसलिएमैंनेसोचाकिमैंभारतमेंपेट्रोलकीकीमतोंपरथोड़ीसीstudyकरूँगा,
औरमैंनेनकेवल 2014 मेंइसकीकीमतोंकोcompareकियाबल्किमैंनेवर्ष 1989 सेअबतककीइसकीकीमतोंकोभीदेखा।मैंनेदेखाकिपेट्रोलकीकीमतमेंमौजूदावृद्धिकच्चेतेलकीकीमतोंमेंबढ़ोतरीकेचलतेहोरहीहैऔरमुझेयहभीपताचलाकि 2014 सेपहलेकच्चेतेलकीकीमतमौजूदाकच्चेतेलकीकीमतोंकीतुलनामेंअधिकथी।और, मुझेयहभीपताचलाकिसभीसरकारेंबढ़तीकच्चेतेलकीकीमतोंकेसाथपेट्रोलकीकीमतेंभीबढ़ाती हैं, लेकिनकच्चेतेलकीकीमतोंमेंगिरावटकेचलतेउनमेंसेकोईभीपेट्रोलकीकीमतोंकोकमनहींकरता।
15 अक्टूबर
1990 में, जबश्रीविश्वनाथप्रतापसिंह (जनतादलसे) प्रधानमंत्रीथे, तोकच्चेतेलकीकीमतें 105% बढ़ीऔरपेट्रोलकीकीमतें 43.88% बढ़ीं।और उसके बाद, जब कांग्रेस सत्ता में आई और 1994 में ,श्री पामुलापर्ती वेंकट नारसिम्हा राव प्रधान मंत्री थे तब कच्चे तेल की कीमतों में 60% की गिरावट आईं थी लेकिन फिर भी पेट्रोल की कीमतें 37.20% बढ़ी थी।जबडॉमनमोहनसिंहकीप्रधानमंत्रीथे,
तबकच्चेतेलकीकीमतें 196% बढ़ींऔरपेट्रोलकीकीमतें 118% बढ़ी,
जो acceptable था।मैंनेकुछडाटाभीनिकलाहै,
आपदेखसकतेहैं:
इससबसेयेपताचलताहैकिजबकच्चेतेलकीगिरावटहोतीहैतबनतोकांग्रेसऔरनहीबीजेपी, कोईभीपेट्रोलकीकीमतेंकमनहींकरते,
लेकिनदोनोंकच्चेतेलकेकीमतेंबढ़नेपेपेट्रोलकीकीमतेंबढ़ातेहैं।अबमैंयेसोचताहूँकिकांग्रेसकोयेसोचकरवोटक्योंदेनाचाहिएकिवोPetrol
pricesकमकरेंगेजबकिमैंजनताहूँकि1994मेंकांग्रेसनेपेट्रोलकीकीमतोंमेंकटौतीनहींकीथीबल्किबढ़ाईथीजबकिकच्चेतेलकीकीमतें60%
गिरीथी ? मुझेलगताहैकिप्रधानमंत्री श्रीनरेंद्रमोदीहमारेदेशकेकल्याणऔरविकासकेलिएकड़ीमेहनतकररहेहैंऔरइसलिएमैंचाहताहूँकिमोदीजी
केSupportersपेट्रोलकीकीमतोंमेंबढ़ोतरीकेकारणकांग्रेसको voteनकरेंऔरअगलेचुनावमेंभी बीजेपीकोहीवोटकरें क्यूंकि कांग्रेस भी Petrol
Price कम नहीं करेगी।जबएकtrollerमुझे 2014 मेंपेट्रोलऔरकच्चेतेलकीकीमतोंकोदेखनेकेलिएकहसकताहै,
तोवहखुद 1994 मेंपेट्रोलकीकीमतोंऔरकच्चेतेलकीकीमतोंकोक्योंनहींदेखसकता?